I-PAC Case: कोयला तस्करी केस में ED की छापेमारी पर ममता बनर्जी का बड़ा हस्तक्षेप

I-PAC Case: प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल के छह और दिल्ली के चार स्थानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई कोयला तस्करी के एक बड़े सिंडिकेट के खिलाफ की गई, जिसकी कथित रूप से अगुवाई अनूप माझी कर रहे हैं। अनूप माझी पर आरोप है कि उन्होंने ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के पट्टे वाले इलाकों से अवैध रूप से कोयला चोरी और खनन किया। ED ने बताया कि छापेमारी शुरू में शांतिपूर्ण तरीके से चल रही थी, लेकिन जब पश्चिम बंगाल पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे तो उन्होंने जबरदस्ती दो स्थानों से फिजिकल दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सबूत अपने कब्जे में ले लिए। ED ने स्पष्ट किया कि इस कार्रवाई का कोई राजनीतिक संगठन से संबंध नहीं है और किसी भी पार्टी कार्यालय की तलाशी नहीं ली गई।
ED ने दी सफाई, चुनाव से नहीं है संबंध
प्रवर्तन निदेशालय ने साफ किया कि यह छापेमारी किसी चुनाव से जुड़ी नहीं है, बल्कि यह मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ नियमित कार्रवाई का हिस्सा है। छापेमारी पूरी तरह से कानूनी नियमों और प्रक्रियाओं के तहत की गई। जांच में यह पता चला कि अनूप माझी ने चोरी किए गए कोयले को पश्चिम बंगाल के बांकुरा, बर्धमान, पुरुलिया और अन्य जिलों की कई फैक्ट्रियों और प्लांट्स में बेचा। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इस कोयले का बड़ा हिस्सा शकंभरी समूह के कॉम्पनियों को बेचा गया। जांच ने हवाला कारोबारियों के साथ संबंध भी उजागर किए। कई गवाहों के बयानों से हवाला कनेक्शन की पुष्टि हुई है।

कोयला तस्करी के पैसों की सफाई का खुलासा
जांच में यह भी पता चला कि कोयला तस्करी से प्राप्त धन की सफाई के लिए एक हवाला ऑपरेटर ने इंडियन पैक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड (I-PAC) के लिए करोड़ों रुपये के लेन-देन को सुविधा प्रदान की। हवाला ऑपरेटर और उसके सहयोगियों को PMLA के तहत खोजे गए। I-PAC भी उन संस्थाओं में से एक है जो हवाला पैसे से जुड़ी हैं। छापेमारी के दौरान, दक्षिण कोलकाता के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस और सारणी थाना के प्रभारी ने अधिकारियों की पहचान सत्यापित करने के लिए एक स्थान पर पहुंचकर छापेमारी की प्रक्रिया देखी। कोलकाता पुलिस कमिश्नर भी घटनास्थल पर आए और अधिकारियों की पहचान की पुष्टि की।
ममता बनर्जी की कार्रवाई से जांच प्रभावित
ED ने बताया कि छापेमारी शांतिपूर्ण और पेशेवर तरीके से चल रही थी, लेकिन जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बड़ी पुलिस बल के साथ वहां पहुंचीं, तो उन्होंने प्रवीण जैन के घर से महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जबरदस्ती ले लिए। इसके बाद ममता बनर्जी का काफिला I-PAC कार्यालय पहुंचा, जहां उन्होंने और उनके साथियों ने राज्य पुलिस के साथ मिलकर और भी फिजिकल दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सबूत जबरदस्ती अपने कब्जे में ले लिए। इस घटना ने जांच प्रक्रिया को बाधित कर दिया और PMLA के तहत चल रही कार्रवाई में व्यवधान उत्पन्न कर दिया। ED ने इस बात पर जोर दिया कि ममता बनर्जी की इस कार्रवाई ने जांच को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।